हर फसल के लिए बुवाई और कटाई का सही समय — महीने-वार गाइड।
40 परिणाम
💡 25-30 दिन पुरानी पौध रोपाई करें।
💡 पहली बारिश के बाद 60×20cm दूरी पर बुवाई करें।
💡 सूखा सहनशील, रेतीली मिट्टी के लिए आदर्श।
💡 अनाज और चारा दोनों के लिए अच्छा।
💡 बॉलवर्म से बचाव के लिए Bt कपास लगाएँ।
💡 राइज़ोबियम से बीजोपचार नाइट्रोजन बढ़ाता है।
💡 बुवाई के 30 और 60 दिन बाद मिट्टी चढ़ाएँ।
💡 अधिक पानी न दें — तिल जलभराव सहन नहीं करता।
💡 गर्म नम जलवायु और भरपूर पानी चाहिए।
💡 ऊँची लाल मिट्टी में अच्छी तरह उगता है।
💡 समय पर बुवाई (1-25 नवंबर) सबसे अच्छी उपज के लिए ज़रूरी।
💡 गेहूँ से ज़्यादा सूखा सहनशील, कमज़ोर मिट्टी के लिए अच्छा।
💡 अधिक सिंचाई से बचें — एक-दो सिंचाई काफी।
💡 वर्षा-आधारित फसल, न्यूनतम सिंचाई ज़रूरत।
💡 लगातार कटाई के लिए हर 2-3 दिन में तोड़ें।
💡 रोज़ेट अवस्था में पहली सिंचाई बहुत ज़रूरी।
💡 परागण के लिए मधुमक्खी ज़रूरी — फूल के समय कीटनाशक न डालें।
💡 बेहतर अंकुरण के लिए बीज रात भर भिगोएँ।
💡 भारी पानी न दें — झुलसा रोग का खतरा।
💡 कलियाँ पंक्ति में 10cm दूरी पर लगाएँ।
💡 नमी बनाए रखने और खरपतवार रोकने के लिए मल्च डालें।
💡 रोज़ कोमल फलियाँ तोड़ें — पकने पर रेशेदार हो जाती हैं।
💡 बेहतर हवा और फल गुणवत्ता के लिए पौधों को सहारा दें।
💡 नियमित तुड़ाई से अधिक फल आते हैं।
💡 सफ़ेद रखने के लिए पत्तों से फूल ढकें।
💡 रोपाई से पहले भरपूर खाद डालने से बंद गोभी अच्छी बनती है।
💡 कटाई से 10 दिन पहले पानी बंद करें — स्टोरेज बेहतर होगा।
💡 प्रमाणित रोग-मुक्त बीज आलू इस्तेमाल करें।
💡 शरद बुवाई (अक्टूबर) बसंत से 10-15% ज़्यादा उपज देती है।
💡 रोपण के बाद सूखी पत्तियों से मल्चिंग करें।
💡 छाया पसंद — अरहर या मक्का के साथ अंतरफसल करें।
💡 हर हफ्ते पकी मिर्च तोड़ने से और फूल आते हैं।
💡 तने टूटने से बचाने के लिए गुच्छों को बांस से सहारा दें।
💡 जलभराव से बचने के लिए ऊँची क्यारियों में लगाएँ।
💡 कटाई के बाद पुरानी शाखाएँ काटें — अगली बार उपज बढ़ेगी।
💡 दो फलन — वर्षा (अग-सित) और शीत (नव-फर)।
💡 क्राउन रॉट रोकने के लिए थाले में नमक डालें।
💡 प्रीमियम गुणवत्ता के लिए दो पत्ती और एक कली तोड़ें।
💡 छायादार पेड़ों के नीचे उगाएँ — सिल्वर ओक आदर्श।
💡 टॉपिंग और डिसकरिंग से पत्ती गुणवत्ता बढ़ती है।